: साधक को प्रतिदिन स्वर्ण मुद्राएं प्रदान करती है।

इस ग्रंथ के में यक्षिणी साधना का अत्यंत विस्तार से वर्णन किया गया है, जो अन्य किसी भी तांत्रिक ग्रंथ में मिलना कठिन है। यक्षिणियाँ कुबेर की सेविकाएं मानी जाती हैं और साधक को धन, दीर्घायु, और अलौकिक शक्तियां प्रदान कर सकती हैं।

यक्षिणी साधना: उद्दामेश्वर तंत्र का मुख्य आकर्षण

: यक्षिणी साधना, षट्कर्म (शांति, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन, मारण), रोगों का उपचार और शत्रुओं पर नियंत्रण।

: इस ग्रंथ में कुल 15 पटल (अध्याय) हैं।

उद्दामेश्वर तंत्र का संक्षिप्त परिचय (Introduction)